Share Market Crash: सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी में गिरावट; मेटल शेयरों पर दबाव
भारतीय शेयर बाजार में 23 अक्टूबर 2026 को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की इंट्राडे गिरावट और निफ्टी में कमजोरी के बीच मेटल, ऑटो तथा रियल्टी शेयरों में बिकवाली हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

मुंबई, 23 अक्टूबर 2026: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने के बाद प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 बिकवाली के दबाव में आ गए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1,000 अंक से अधिक फिसल गया, जबकि निफ्टी 22,500 के स्तर से नीचे पहुंच गया।
दोपहर तक उपलब्ध बाजार रिपोर्टों के अनुसार, सेंसेक्स में करीब 450 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 72,800 के नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, निफ्टी 50 में 200 अंकों से अधिक की कमजोरी देखी गई।
बाजार में गिरावट केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली बढ़ी। मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों के सूचकांकों में लगभग 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
शुरुआती बढ़त के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
शुक्रवार सुबह भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती समर्थन मिला।
सुबह करीब 9:19 बजे निफ्टी 50 लगभग 22,726 के स्तर पर और सेंसेक्स 73,634 के आसपास कारोबार कर रहा था।
हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ निवेशकों ने विभिन्न सेक्टरों में बिकवाली शुरू कर दी। इसके कारण बाजार की शुरुआती बढ़त समाप्त हो गई।
सुबह 10:13 बजे तक रॉयटर्स के अनुसार, निफ्टी 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,529.15 पर और सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत कमजोर होकर 72,964.13 पर पहुंच गया था।
इसके बाद बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा और व्यापक बाजार के कई सूचकांकों में गिरावट बढ़ गई।
मेटल सेक्टर में बिकवाली, अन्य सेक्टर भी प्रभावित
शुक्रवार के कारोबार में मेटल शेयरों पर विशेष दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मेटल इंडेक्स लगभग 1.5 प्रतिशत कमजोर था। बाद की बाजार रिपोर्टों में मेटल सेक्टर में करीब 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
मेटल के अलावा ऑटो, रियल्टी, सरकारी बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से संबंधित शेयरों में भी कमजोरी दिखाई दी।
इन सेक्टरों में बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।
वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। टीसीएस और इंफोसिस जैसी बड़ी आईटी कंपनियों में खरीदारी से बाजार को कुछ समर्थन मिला।
हालांकि, अन्य सेक्टरों की व्यापक कमजोरी के कारण आईटी शेयरों की बढ़त बाजार को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी चिंता का कारण
भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी के प्रमुख कारणों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी शामिल रही।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश के आयात बिल, महंगाई और विभिन्न उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
ऊर्जा की बढ़ती लागत विशेष रूप से परिवहन, विमानन, रसायन और अन्य ईंधन-निर्भर उद्योगों के लिए चुनौती बन सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे कंपनियों के लाभ मार्जिन और घरेलू उपभोग पर दबाव बढ़ सकता है।
पश्चिम एशिया के तनाव से वैश्विक बाजारों पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला।
ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी आशंकाओं ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ाई है। विशेष रूप से सऊदी अरब से संबंधित घटनाक्रम और क्षेत्रीय संघर्ष ने कच्चे तेल के बाजार को प्रभावित किया।
एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई। जापान के निक्केई और दक्षिण कोरिया के कोस्पी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखा गया।
अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान तकनीकी कंपनियों से जुड़े शेयरों में गिरावट आई थी।
इन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारतीय निवेशकों ने भी जोखिम वाले निवेशों को लेकर सतर्क रुख अपनाया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी गिरावट
शुक्रवार को व्यापक बाजार में प्रमुख सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोरी दिखाई दी।
रॉयटर्स की सुबह की रिपोर्ट के अनुसार, स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 3.4 प्रतिशत और मिडकैप शेयरों में करीब 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
अन्य इंट्राडे रिपोर्टों में निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में लगभग 3 प्रतिशत तक की कमजोरी सामने आई।
मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव का प्रभाव उन निवेशकों पर पड़ सकता है जिनके पोर्टफोलियो में इन श्रेणियों की कंपनियों की हिस्सेदारी अधिक है।
हालांकि, किसी विशेष निवेशक के पोर्टफोलियो पर वास्तविक असर उसकी शेयर होल्डिंग, निवेश अवधि और संबंधित कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
विदेशी निवेश और संस्थागत खरीदारी के आंकड़े
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
22 अक्टूबर के उपलब्ध अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1,022 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।
इसी अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों की शुद्ध खरीदारी लगभग 1,614 करोड़ रुपये रही।
हालांकि, इन आंकड़ों के बावजूद शुक्रवार को वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बाजार में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया।
इससे स्पष्ट होता है कि बाजार की दिशा केवल संस्थागत निवेश पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति से भी प्रभावित होती है।
पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी है कमजोरी
शुक्रवार की गिरावट से पहले भी भारतीय शेयर बाजार लगातार तीन कारोबारी सत्रों में कमजोर रहा था।
22 अक्टूबर को बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ था।
इसी दिन निफ्टी 50 में 123.70 अंकों की गिरावट आई थी और यह 22,687.65 पर बंद हुआ था।
पिछले तीन सत्रों में प्रमुख सूचकांकों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
शुक्रवार को शुरुआती बढ़त के बाद दोबारा बिकवाली शुरू होने से बाजार की कमजोरी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भी बनी रही।
निवेशकों के लिए किन संकेतकों पर नजर रखना जरूरी?
बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया का घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे महत्वपूर्ण संकेतक बने हुए हैं।
निफ्टी के लिए 22,500 और 22,800 जैसे स्तरों का उल्लेख कुछ तकनीकी विश्लेषकों ने किया है। हालांकि, तकनीकी स्तर बाजार की भविष्य की दिशा की गारंटी नहीं देते।
निवेशकों के लिए किसी भी निर्णय से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, 23 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में दिखाई दी कमजोरी के पीछे वैश्विक अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और विभिन्न सेक्टरों में व्यापक बिकवाली प्रमुख कारक रहे हैं।
नोट: यह रिपोर्ट 23 अक्टूबर 2026 के इंट्राडे कारोबार पर आधारित है। सेंसेक्स और निफ्टी के स्तर बाजार के दौरान लगातार बदलते रहते हैं। यहां दिए गए आंकड़ों को अंतिम क्लोजिंग स्तर नहीं माना जाना चाहिए।
इस खबर में कोई तथ्यात्मक गलती मिली? सुधार का अनुरोध भेजें
मूल लेख: https://www.gt24x7bharat.in/taza-khabar/share-market-crash-senseks-700-ank-se-jyaadaa-tootaa-niphti-men-giraavat-metal-sheyaron-par-dabaav


अपनी बात रखें
विषय पर चर्चा करें। निजी जानकारी, अपमान और असत्य आरोप से बचें। टिप्पणियां समीक्षा के बाद दिखाई जाती हैं।