'नीतीश जी रहते तो ऐसा नहीं होता': जमानत रद्द होने के बाद अनंत सिंह का बयान, 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी है और उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। फैसले के बाद अनंत सिंह ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए जदयू नेता नीरज कुमार पर साजिश के आरोप लगाए। उन्होंने नीतीश कुमार को याद करते हुए कहा कि यदि वे पार्टी की कमान संभाल रहे होते, तो उन्हें इस तरह निष्कासित नहीं किया जाता।

पटना, 30 अक्टूबर 2026: बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनंत कुमार सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उनकी जमानत रद्द करते हुए 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
अदालत के फैसले के बाद पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह निर्धारित समय पर अदालत के आदेश का पालन करेंगे।
इसी दौरान उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार को याद करते हुए कहा कि यदि नीतीश कुमार पार्टी के मामलों को पहले की तरह देख रहे होते, तो उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होता।
अनंत सिंह ने अपने निष्कासन और कानूनी परेशानियों के पीछे जदयू नेता नीरज कुमार की भूमिका होने का आरोप भी लगाया। हालांकि, नीरज कुमार ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत क्यों रद्द की?
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करने का आदेश दिया।
अदालत ने माना कि जमानत देते समय अपराध के आरोपों की गंभीरता और अनंत सिंह के आपराधिक मामलों से संबंधित रिकॉर्ड पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था।
पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दी थी।
इस आदेश को चुनौती देते हुए मृतक दुलारचंद यादव के परिवार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही बिहार पुलिस को चार महीने के भीतर मामले की जांच पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
'कोर्ट हमारा दुश्मन नहीं है': अनंत सिंह
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने कहा कि वह न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा कि अदालत जो भी निर्णय करेगी, वह उसे स्वीकार करेंगे और उन्हें भविष्य में फिर जमानत मिलने की उम्मीद है।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि वह कब आत्मसमर्पण करेंगे, तो उन्होंने कहा कि निर्धारित तारीख पर अदालत के समक्ष उपस्थित होंगे।
अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि वह 1 दिसंबर को अदालत के निर्देश का पालन करेंगे।
उनका कहना था कि उन्हें पहले भी न्यायपालिका पर भरोसा रहा है और आगे भी रहेगा।
हालांकि, भविष्य में उन्हें जमानत मिलेगी या नहीं, इसका निर्णय संबंधित न्यायिक कार्यवाही और कानूनी आधारों पर निर्भर करेगा।
'नीतीश जी रहते तो यह सब नहीं होता'
पत्रकारों से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने जदयू से अपने निष्कासन पर नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार पार्टी की गतिविधियों में पहले की तरह सक्रिय होते और फैसलों पर उनका नियंत्रण होता, तो उन्हें इस तरह पार्टी से बाहर नहीं किया जाता।
अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि पार्टी ने नीरज कुमार के साथ उनके राजनीतिक विवाद के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की।
उन्होंने कहा कि उनका विरोध जदयू या सरकार से नहीं, बल्कि नीरज कुमार से था।
यह टिप्पणी जदयू के आंतरिक राजनीतिक विवाद से संबंधित थी। इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नीतीश कुमार के प्रभाव के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नीरज कुमार पर लगाए गंभीर आरोप
अनंत सिंह ने जदयू नेता नीरज कुमार पर दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें फंसाने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि उनका नाम जानबूझकर इस मामले में शामिल कराया गया।
अनंत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
हालांकि, नीरज कुमार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जमानत रद्द कराने की याचिका दाखिल करने से उनका कोई संबंध नहीं है।
नीरज कुमार के अनुसार, वह संबंधित याचिका में पक्षकार नहीं थे।
इस मामले में ध्यान देने योग्य बात यह है कि दुलारचंद यादव के परिवार की ओर से दाखिल याचिका और अनंत सिंह द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप अलग-अलग विषय हैं।
किसी व्यक्ति को हत्या की साजिश का जिम्मेदार ठहराने के लिए जांच और न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाण आवश्यक हैं।
क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?
दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा क्षेत्र में हुई थी।
वह उस समय जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे।
चुनावी प्रचार के दौरान प्रतिद्वंद्वी पक्षों के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।
पुलिस के अनुसार, घटना में दुलारचंद यादव को कथित तौर पर एक वाहन से कुचला गया था।
परिवार ने आरोप लगाया था कि उनके साथ मारपीट की गई और वाहन चढ़ाने से पहले उन्हें गोली भी मारी गई थी।
इस मामले में अनंत सिंह को प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया था।
उन्हें 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, अनंत सिंह ने अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है।
जमानत रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि हत्या के आरोप में उन्हें दोषी ठहरा दिया गया है। मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
जेल में रहते हुए जीता था विधानसभा चुनाव
दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद भी अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।
उन्होंने न्यायिक हिरासत में रहते हुए विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की।
बाद में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर मार्च 2026 में वह जेल से बाहर आए।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा में आत्मसमर्पण करना होगा।
जदयू ने छह साल के लिए किया था निष्कासित
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कुछ दिन पहले ही जनता दल यूनाइटेड ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था।
पार्टी ने उन पर संगठन विरोधी गतिविधियों और आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगाया था।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में जदयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था।
लेकिन अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया।
इसके बाद जदयू नेतृत्व ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता के संबंध में भी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधायक के रूप में अयोग्यता अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
तेजस्वी यादव की भी आई प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न्यायपालिका अपना काम कर रही है।
उन्होंने अनंत सिंह के राजनीतिक रुख में बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी अनंत सिंह ने स्वयं को राजनीतिक साजिश का शिकार बताए जाने के आरोप लगाए थे।
तेजस्वी यादव की टिप्पणी बिहार में अनंत सिंह और जदयू के बीच बढ़ते मतभेदों की पृष्ठभूमि में सामने आई है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
इसके अतिरिक्त बिहार पुलिस को दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है।
इस अवधि में जांच एजेंसी को संबंधित साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ानी होगी।
अनंत सिंह ने अदालत के आदेश का पालन करने और न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखने की बात कही है।
दूसरी ओर, जदयू से निष्कासन और नीरज कुमार के साथ उनका राजनीतिक विवाद भी चर्चा में है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। हत्या के मामले में उनके खिलाफ आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी बाकी है।
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मूल लेख: https://www.gt24x7bharat.in/taza-khabar/nitish-ji-rahate-to-aisaa-nahin-hotaa-jamaanat-radd-hone-ke-baad-anant-sinh-kaa-bayaan-1-disanbar-tak-karanaa-hogaa-sarendar




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