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यूपी की मतदाता सूची पर संजय सिंह के गंभीर आरोप, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लाखों मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस बीच चुनाव प्रशासन ने पीलीभीत में 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी मिलने की पुष्टि की है।

यूपी की मतदाता सूची पर संजय सिंह के गंभीर आरोप, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

संजय सिंह ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के माध्यम से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए गए और मतदाता पहचान संबंधी विवरणों में बदलाव किए गए।

उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की एक सोशल मीडिया टिप्पणी को भी आपत्तिजनक बताते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारी के भाजपा के निर्देश पर काम करने या किसी विशेष समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप स्वतंत्र जांच में सिद्ध नहीं हुए हैं।

संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?

संजय सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के संशोधन के दौरान लगभग 13 लाख ऐसे नाम जोड़े गए, जिनके बारे में उन्होंने भाजपा से जुड़े होने का आरोप लगाया।

उन्होंने लगभग 85 हजार सामान्य नागरिकों के नाम हटाए जाने का भी दावा किया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने पीलीभीत, बिसवां, तरबगंज और जहानाबाद के कुछ मतदान केंद्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां मुस्लिम मतदाताओं के नाम असामान्य रूप से बड़ी संख्या में हटाए गए।

संजय सिंह के अनुसार, कुछ बूथों पर मुस्लिम मतदाताओं के 90 से 95 प्रतिशत तक नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

उन्होंने मांग की कि इन मामलों में संबंधित मतदाता सूचियों, आवेदन पत्रों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।

इन दावों में उल्लिखित संख्याओं और कथित सामुदायिक आधार पर नाम हटाए जाने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पीलीभीत में 10,470 प्रविष्टियों में गड़बड़ी की पुष्टि

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची से संबंधित गड़बड़ियों का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन प्रशासन ने जांच कराई।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच एक कंप्यूटर सहायक ने मतदाता विवरण में संशोधन से संबंधित 13,779 फॉर्म-8 प्रविष्टियां दर्ज की थीं।

जांच में पाया गया कि इन आवेदनों से संबंधित भौतिक फॉर्म और आवश्यक सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं थे।

इनमें से 10,470 संशोधन स्वीकृत किए जा चुके थे।

प्रशासन की जांच में सभी 10,470 स्वीकृत प्रविष्टियों में अनियमितताएं पाई गईं।

इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड में सुधार करने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के निर्देश दिए गए।

इस मामले में दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश भी दिया गया।

यह महत्वपूर्ण है कि पीलीभीत में प्रशासन द्वारा पुष्टि की गई 10,470 अनियमित प्रविष्टियों और राजनीतिक दलों द्वारा बताए गए लगभग 13 हजार मामलों को एक ही सत्यापित आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

EPIC नंबर और मतदाता विवरण में बदलाव का विवाद

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों में बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों ने शिकायतें की थीं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि लगभग 13,150 मतदाताओं के नाम और पिता के नाम में बदलाव हुए, जबकि उनके EPIC नंबर और क्रमांक पहले जैसे बने रहे।

EPIC यानी Electors Photo Identity Card मतदाता पहचान पत्र से संबंधित पहचान संख्या है।

समाजवादी पार्टी ने भी मतदाता विवरण में कथित अनधिकृत बदलावों को लेकर सवाल उठाए।

इसके बाद निर्वाचन प्रशासन ने मामले की जांच कराई और हजारों प्रविष्टियों में अनियमितताओं की पुष्टि की।

हालांकि, जांच में रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी सामने आना और किसी राजनीतिक दल के निर्देश पर जानबूझकर बदलाव किए जाने का आरोप अलग-अलग बातें हैं।

किसी संगठित राजनीतिक साजिश का निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त साक्ष्यों की आवश्यकता होगी।

मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़े पैमाने पर आवेदन किए गए।

उन्होंने पीलीभीत, बिसवां, तरबगंज और जहानाबाद के मतदान केंद्रों का उल्लेख किया।

स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता संस्थान द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने भी उत्तर प्रदेश में मतदाता नाम हटाने से संबंधित फॉर्म-7 आवेदनों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

संस्थान की जांच में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन सामने आने का दावा किया गया, जिनमें नाम हटाने का कारण स्पष्ट नहीं था।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्थानों पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम सामूहिक रूप से हटाने के प्रयासों की भी पहचान की गई।

हालांकि, नाम हटाने के लिए आवेदन किया जाना और किसी पात्र मतदाता का नाम वास्तव में अंतिम मतदाता सूची से हट जाना अलग-अलग घटनाएं हैं।

इसलिए संजय सिंह के 90 से 95 प्रतिशत नाम हटाए जाने के आरोप की पुष्टि संबंधित मतदान केंद्रों की पूर्व और संशोधित मतदाता सूचियों के तुलनात्मक परीक्षण से ही हो सकती है।

87,127 फॉर्म-7 आवेदनों पर उठे सवाल

द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की जांच में उत्तर प्रदेश में मतदाता नाम हटाने के लिए सॉफ्टवेयर द्वारा तैयार किए गए 87,127 फॉर्म-7 आवेदनों का उल्लेख किया गया है।

संस्थान ने दावा किया कि इन आवेदनों में नाम हटाने का कारण दर्ज नहीं था।

इस रिपोर्ट में पहले 85,854 आवेदनों का आंकड़ा प्रकाशित किया गया था, जिसे 20 अक्टूबर को संशोधित करके 87,127 किया गया।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस रिपोर्ट के कुछ निष्कर्षों को चुनौती दी थी।

उनके अनुसार, संबंधित मतदाताओं को नियमानुसार नोटिस और सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराया गया था।

इस विवाद में महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आवेदन तैयार करने, नाम हटाने के कारण दर्ज करने और संबंधित मतदाताओं को सूचना देने की प्रक्रिया में लागू नियमों का पालन हुआ या नहीं।

रिपोर्ट में उल्लिखित आवेदनों की संख्या को वास्तविक रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या के समान नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी की टिप्पणी पर विवाद

मतदाता सूची में असामान्य नाम दर्ज होने के मामले को लेकर संजय सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बीच सोशल मीडिया पर विवाद भी सामने आया।

संजय सिंह ने एक मतदाता प्रविष्टि में जाति से संबंधित शब्दों के उपयोग पर सवाल उठाए थे।

इसके जवाब में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक टिप्पणी की गई, जिसमें एक अन्य असामान्य नाम का उल्लेख करते हुए जाति और अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित संदर्भ दिया गया।

संजय सिंह ने इस टिप्पणी को आपत्तिजनक और सांप्रदायिक मानसिकता का परिचायक बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी को इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

दूसरी ओर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में असामान्य नाम दर्ज होने की घटनाओं की जांच की जा रही है।

उनका कहना था कि ऐसी त्रुटियों को किसी विशेष जाति या समुदाय के खिलाफ भेदभाव का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

निर्वाचन कार्यालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ मतदाता पर्चियों को फर्जी बताते हुए उनकी भी जांच करने की बात कही।

चुनाव प्रशासन ने दिए राज्यव्यापी जांच के निर्देश

पीलीभीत और अन्य क्षेत्रों में मतदाता सूची से संबंधित शिकायतें सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के निर्वाचन प्रशासन ने राज्यभर में समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने अधिकारियों से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा दर्ज फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच करने को कहा है।

फॉर्म-6 का उपयोग नए मतदाता पंजीकरण, फॉर्म-7 का उपयोग नाम हटाने संबंधी आपत्तियों और फॉर्म-8 का उपयोग मतदाता विवरण में संशोधन के लिए किया जाता है।

निर्वाचन प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को रिकॉर्ड की जांच करने, गलत प्रविष्टियों में सुधार करने और भविष्य में ऐसी त्रुटियां रोकने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही कंप्यूटर सहायकों द्वारा सीधे मतदाता फॉर्म दर्ज करने पर रोक लगाई गई है।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मतदाताओं से प्राप्त भौतिक आवेदनों का डिजिटलीकरण निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए।

गड़बड़ी मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

उत्तर प्रदेश निर्वाचन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में अनियमितताएं पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और कंप्यूटर सहायकों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के अंतर्गत निर्वाचन सूची से संबंधित आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रशासन ने मंडलायुक्तों को मतदाता सूची के कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी भी दी है।

इसके अतिरिक्त दोहरी प्रविष्टियों को हटाने और शिकायतों का समय पर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

भाजपा ने क्या कहा?

भाजपा ने मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है।

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पार्टी मतदाता सूचियों की शुद्धता का समर्थन करती है और सभी राजनीतिक दलों को पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने जानबूझकर गलत बदलाव किए हैं, तो मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में अपनी संलिप्तता से संबंधित विपक्षी आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

इस प्रकार, मतदाता सूची में पाई गई प्रशासनिक अनियमितताओं और राजनीतिक दलों पर लगाए गए आरोपों के बीच अंतर करना आवश्यक है।

मतदाता सूची में नाम कैसे जांचें?

उत्तर प्रदेश के मतदाता भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी मतदाता पंजीकरण स्थिति जांच सकते हैं।

मतदाता अपने EPIC नंबर या उपलब्ध व्यक्तिगत विवरण के आधार पर सूची में नाम खोज सकते हैं।

यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है या विवरण में त्रुटि है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी से संपर्क कर सकता है।

आवश्यकतानुसार नाम जोड़ने या विवरण सुधारने के लिए संबंधित आवेदन भी किया जा सकता है।

मतदाता सूची में नाम और पहचान विवरण सही होना मतदान के अधिकार के प्रभावी उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है।

निष्पक्ष जांच की मांग के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से संबंधित विवाद अब प्रशासनिक जांच के साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।

संजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

दूसरी ओर, निर्वाचन प्रशासन ने पीलीभीत में हजारों प्रविष्टियों में गड़बड़ी स्वीकार करते हुए राज्यव्यापी समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

फिलहाल, सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जांच में कितनी प्रविष्टियां गलत पाई जाती हैं, कितने पात्र मतदाताओं के अधिकार वास्तव में प्रभावित हुए और क्या किसी अनियमितता के पीछे जानबूझकर की गई कार्रवाई के साक्ष्य मिलते हैं।

पीलीभीत में 10,470 अनियमित प्रविष्टियों की पुष्टि हुई है, लेकिन संजय सिंह के सभी राजनीतिक आरोप अभी स्वतंत्र रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।

स्रोत और संदर्भ

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