खड़गे का ऐलान: 1 नवंबर को दिल्ली में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए 1 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम विपक्षी INDIA गठबंधन के अभियान का हिस्सा होगा।
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी वीडियो संदेश में खड़गे ने आरोप लगाया कि देश में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को तत्काल रोकने की मांग की।
खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त उनके निर्देशों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें कांग्रेस नेतृत्व के राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली आयोजित की जाएगी।
उन्होंने इस कार्यक्रम को मतदान के अधिकार, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से संबंधित मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाने का प्रयास बताया।
खड़गे ने देश के नागरिकों से रैली में भाग लेने की अपील की और कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता तथा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने इस कार्यक्रम से पहले देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली तक मार्च निकालने की भी योजना बनाई है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
उनका दावा है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और संशोधन की प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई हैं।
खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग को सभी पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा करनी चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की अनियमितता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाबदेही से बचाने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, खड़गे द्वारा लगाए गए आरोप किसी न्यायिक या स्वतंत्र जांच में सिद्ध निष्कर्ष नहीं हैं।
INDIA गठबंधन की तीन प्रमुख मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने सार्वजनिक बयान में विपक्षी INDIA गठबंधन की तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं।
पहली मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित 2023 के कानून के विवादित प्रावधानों को निरस्त किया जाए।
दूसरी मांग: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और जिन पात्र मतदाताओं के नाम कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें नियमानुसार बहाल किया जाए।
तीसरी मांग: भविष्य के सभी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर के माध्यम से आयोजित किए जाएं।
खड़गे ने इन मांगों को चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से संबंधित बताया।
हालांकि, इन मांगों को लागू करने के लिए अलग-अलग कानूनी, प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी।
SIR प्रक्रिया पर क्यों हो रहा विवाद?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है।
यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की व्यापक जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है।
इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और मृत, स्थानांतरित, दोहरे पंजीकरण या अन्य कारणों से अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जा सकते हैं।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान पर्याप्त पारदर्शिता, दस्तावेजों की जांच और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा के नेताओं ने SIR का विरोध करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है और मतदाता सूचियों को अद्यतन रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि संशोधन प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जा रही है।
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची पर खड़गे ने उठाए सवाल
26 अक्टूबर को जारी अपने सोशल मीडिया संदेश में खड़गे ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से संबंधित कुछ आंकड़ों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
फॉर्म-6 का उपयोग सामान्यतः मतदाता सूची में नए पंजीकरण के लिए किया जाता है।
खड़गे ने पीलीभीत जिले में 10,470 मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि इन मामलों के सामने आने के बाद फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के निर्देश देने पड़े।
हालांकि, इन आंकड़ों और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
इसलिए इन्हें खड़गे द्वारा प्रस्तुत दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर पर भी सवाल
कांग्रेस
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मूल लेख: https://www.gt24x7bharat.in/rajniti/khadage-kaa-ailaan-1-navanbar-ko-dilli-men-vot-bachaao-desh-bachaao-raili-cec-jnyaanesh-kumaar-ke-istiphe-ki-maang




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