साधु-संतों के साथ रामलीला मैदान पहुंचे पप्पू यादव, 'वोट चोरी' के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की महारैली
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली में सांसद पप्पू यादव साधु-संतों के जुलूस के साथ पहुंचे। पप्पू यादव ने दावा किया कि इस मार्च में 10 हजार से अधिक साधु-संत शामिल हैं। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को विपक्षी INDIA गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु-संतों के जुलूस के साथ रामलीला मैदान की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इस दौरान उनके साथ बड़ी संख्या में धार्मिक प्रतिनिधि और समर्थक मौजूद थे।
विपक्ष की यह रैली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित 'वोट चोरी' और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे सवालों के विरोध में आयोजित की गई है।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
साधु-संतों के साथ निकला पप्पू यादव का जुलूस
एबीपी न्यूज की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पप्पू यादव साधु-संतों के एक बड़े समूह के साथ दिल्ली के फिरोजशाह रोड से मिंटो रोड की ओर मार्च करते दिखाई दिए।
इसके बाद जुलूस रामलीला मैदान की ओर बढ़ा, जहां विपक्षी गठबंधन की महारैली आयोजित की गई।
पप्पू यादव ने दावा किया कि उनके साथ 10 हजार से अधिक साधु-संत इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं।
हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने प्रदर्शन को किसानों, विद्यार्थियों, युवाओं और अन्य वर्गों के अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया।
कंप्यूटर बाबा भी मार्च में शामिल
साधु-संतों के इस जुलूस में कंप्यूटर बाबा के नाम से पहचाने जाने वाले धार्मिक नेता भी शामिल दिखाई दिए।
एबीपी न्यूज के अनुसार, कनॉट प्लेस स्थित इंदिरा चौक के पास उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की।
कंप्यूटर बाबा ने दावा किया कि बड़ी संख्या में साधु-संत कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में एकत्र हुए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साधु-संतों को मतदान के अधिकार के इस्तेमाल में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए।
मार्च में शामिल कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
रामलीला मैदान में विपक्ष की महारैली
INDIA गठबंधन ने दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में इस महारैली का आयोजन किया है।
इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की भागीदारी का कार्यक्रम तय किया गया।
रैली से पहले राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की थी।
आयोजकों ने इस कार्यक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची की निष्पक्षता से संबंधित मुद्दों पर केंद्रित बताया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
इसी आधार पर विपक्षी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए 'वोट चोरी' और चुनावी साजिश के आरोपों को किसी अंतिम न्यायिक निर्णय से सिद्ध तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची की शुद्धता और संबंधित शिकायतों की जांच को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है।
विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें
रामलीला मैदान की रैली से पहले विपक्षी गठबंधन ने चुनाव व्यवस्था से जुड़ी तीन प्रमुख मांगें उठाई हैं।
पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले प्रावधानों में बदलाव से संबंधित है।
दूसरी मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया रोकने और कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की है।
तीसरी मांग भविष्य के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय मतपत्रों से कराने की है।
ये विपक्षी गठबंधन की राजनीतिक और नीतिगत मांगें हैं। इनके संबंध में अंतिम निर्णय लागू कानूनों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार ही लिया जा सकता है।
रैली से पहले 'जन महाभियोग' कार्यक्रम
31 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'जन महाभियोग' नाम से एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित किया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
कार्यक्रम में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोपों वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया।
हालांकि, यह वास्तविक संसदीय महाभियोग या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं थी।
इसका उद्देश्य विपक्ष की राजनीतिक आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से सामने रखना था।
दिल्ली पुलिस ने किए सुरक्षा इंतजाम
रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रैली और आसपास के क्षेत्रों में चार हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की योजना बनाई गई।
इसके अलावा सुरक्षा निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे और अन्य व्यवस्थाएं की गईं।
कनॉट प्लेस, मिंटो रोड, अजमेरी गेट और रामलीला मैदान के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किए गए।
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस
इस महारैली के केंद्र में मतदाता सूची, चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे हैं।
विपक्षी दलों का कहना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को बिना बाधा मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, मतदाता सूची का सत्यापन और संशोधन चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रियाओं के अंतर्गत किया जाता है।
किसी विशेष मामले में अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
पप्पू यादव के मार्च से चर्चा में साधु-संतों की भागीदारी
रामलीला मैदान की महारैली में पप्पू यादव का साधु-संतों के साथ मार्च करना कार्यक्रम की प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा।
उनके साथ मौजूद धार्मिक प्रतिनिधियों ने भी चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।
हालांकि, इस जुलूस में शामिल साधु-संतों की कुल संख्या और उनके प्रतिनिधित्व का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली की इस रैली में विपक्ष ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया है। पप्पू यादव और साधु-संतों का मार्च इसी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहा।
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मूल लेख: https://www.gt24x7bharat.in/rajniti/saadhu-santon-ke-saath-raamalilaa-maidaan-pahunche-pappoo-yaadav-vot-chori-ke-aaropon-aur-mukhy-chunaav-aayukt-ke-khilaaph-vipaksh-ki-mahaaraili




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